Top 5 Novel in Hindi by – Munshi Premchand

नमस्कार दोस्तों ,
आज मै आप लोगो को Munshi Premchand के सबसे अच्छे 5 नावेल के बारे में बताने जा रहा हूँ ! जो हिन्दी साहित्य में लोगो को बहुत पसंद आया है ! ऐसे तो Munshi Premchand का साडी कहानिया बहुत ही अच्छा होता है लेकिन उसमे कुछ कहानिया ऐसे हैं , जो लोगो को बहुत पसंद आया !

Munshi Premchand

Munshi Premchand Kaun Hai ?

ऐसे तो हिंदी साहित्य पढने बाले लोगो के प्रेमचन्द के वारे काफी जानकारी होंगे ! लेकिन जो लोग हमारे पोस्ट पर नए आये हैं ,उनको बता दूँ ! प्रेमचन्द हिंदी साहित्य के बहुत बड़े लेखक हैं ,जिनका जन्म 31 जुलाई 1880 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में हुआ था ! Munshi Premchand के पिता का नाम मुंशी अजायबराय एवं माता का नाम आनन्दी देवी था ! उनके माँ पापा कायस्थ परिवार से तालुक रखा करते थे !

प्रेमचन्द वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था ! प्रेमचंद का आरम्भिक शिक्षा फ़ारसी में हुआ था ! प्रेमचन्द जव सात वर्ष के थे, तब उनकी माता का मृतु हो गया ! और पन्द्रह वर्ष के उम्र में उनका विवाह कर दिया गया जब सोलह वर्ष के हुए तो उनके पिता का भी मृतु हो गया !

गोदान

गोदान का अर्थ है गाय का दान ! यह मुंशी प्रेमचन्द का सबसे महत्त्व पूर्ण उपन्यास मन जाता है ! इसका पकाशन भी 1936 में किया गया था ! इस उपन्यास में अनेक प्रकार के समस्या का उजागर किया गया है !

गोदान का प्रमुख पात्र होरी है , जो अपने समस्या को दूर करने के लिए कर्ज लेता है ! और उस कर्ज से गाय लेते हैं , और गाय भी किसी वजह से मर जाता है ! जिससे की वो काफी दुखी होता है !

सेवा सदन

सेवा सदन उपन्यास मुंशी प्रेमचन्द का पहला उपन्यास है , इसका प्रकाशन 1918 में किया गया था ! इस उपन्यास का मुख्य पात्र सुमन है ,जो एक लड़की है ! इस उपन्यास में मुंशी प्रेमचन्द ने गरीबो के हालत पर ज्यादा जोर डाले हैं ! की कोई गरीब व्यक्ति जो दहेज़ देने में सक्षम नहीं है ! उसे समाज में कैसे गिर कर रहना रहना पड़ता है !

इस उपन्यास में सुमन के पापा काफी गरीव हैं ,जो दहेज़ देने सक्षम नहीं हैं और इसी वजह से सुमन की सादी किसी अयोग्य लड़के से कर देते हैं ! जो उम्र में सुमन से काफी बड़े हैं और दोवाहा हैं ! कहानी इसी के इद्र गिर्द चलता रहता है !

रंगभूमि

रंगभूमि का प्रकाशन 1924 में किया था , प्रेमचन्द ने इस उपन्यास में स्त्री के दुर्दशा का भयाबह चित्र का वर्णन किये हैं ! उस समय महिलाये पर काफी अत्याचार हुआ करता था , लोग महिलाये को अपने पैर के जुटे समझा करते थे ! लोगो को ऐसा सोच था की स्त्री सिर्फ और खाना बनाने और पुरुषों को सेवा करने के लिए बनी है ! इसके अलावा महिलाये कुछ नहीं कर सकती है !

निर्मला

इसका पकाशन 1928 किया गया ! यह मुंशी प्रेमचन्द का पहला अथ्रातवादी उपन्यास माना है ! इस कहानी में प्रेमचन्द ने वेमेल विवाह और दहेज़ प्रथा को लेकर किये हैं !

इस उपन्यास का मुख्य पात्र निर्मला है ,जो 15 वर्ष की सुन्दर एवं सुशील लड़की है ! इस उपन्यास में मुंशी प्रेमचन्द ने गरीबो के हालत पर ज्यादा जोर डाले हैं ! की कोई गरीब व्यक्ति जो दहेज़ देने में सक्षम नहीं है ! उसे समाज में कैसे गिर कर रहना रहना पड़ता है !

इस उपन्यास में निर्मला के पापा काफी गरीव हैं ,जो दहेज़ देने सक्षम नहीं हैं और इसी वजह से सुमन की सादी किसी अयोग्य लड़के से कर देते हैं ! जो उम्र में सुमन से काफी बड़े हैं ! और निर्मला अपने पापा के हालात पस कुछ नही बोल पाती ! उनके पापा जैसे शादी किये वैसे ही निर्मला ने कबूल कर ली ! कहानी इसी के इद्र गिर्द चलता रहता है ! और कहानी का अन्त बहुत दुखान्त होता है !

गबन

निर्मला के बाद गबन दुसरा अथ्रातवादी उपन्यास माना जाता है ! इसका पकाशन भी 1928 में हुआ था ! इसका मूल कहानी है महिलायों के पुरुषो के जीवन पर प्रभाव ! इस उपन्यास पर 1966 में एक फिल्म भी बनाया गया है !


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