Sunder Kand Pdf Download in Hindi (Latest)

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नमस्कार दोस्तों
आज मै आपलोगों के लिए बहुत ही बढ़िया आतिक्ल्र लेकर आया हु , जो की रामायण का बहुत ही इम्पोर्टेन्ट पार्ट है जिसका नाम Sunder Kand है ! इसमें हनुमान जी का लंका में प्रवेश सीता जी से मिलना लंका दहन तथा विभीषण का श्री राम जी से मिलना आदि वर्णन है !

Sunder Kand

what is Sunder Kand

जमजांत जी के सुंदर वचन सुनकर हनुमानजी बहुत खुश हुए और बोले कि भाई तुम दूर रहकर कंदमूल फल फूल खा और मेरी राह देखना मैं सीता जी को अवश्य ही खोज लूंगा ऐसा मुझे विश्वास है ! इतना कहकर सभी को शीश झुकाकर प्रणाम करके हनुमान जी प्रसन्नता पूर्वक निकल पड़े समुन्द्र के तीर पर एक अति सुंदर पर्वत था हनुमान जी अचानक से उसके ऊपर चढ गए और वह पर्वत पानी में आ गया !

समुन्द्र का यात्रा

समुन्द्र की बात मानकर हनुमान जी से विश्राम करने को कहा इस पर हनुमान जी बोले जब तक में श्रीराम का काम नहीं करूंगा ! तब तक मुझे आराम नहीं करना है , स्वर्ग लोक से देवता ने हनुमान जी को जाते हुए देखा और उनकी परीक्षा लेने के लिए शुभ नामक सर्पों की माता को भेज दिया ! हनुमान जी के सामने प्रकट होकर उन्हें खाने का जिद करने लगे , तब हनुमानजी ने कहा कि मां का कार्य करने के बाद मै स्वयं आकर तुम्हारे मुंह में घुस जाऊंगा तब तुम मुझे खा लेना, फिर भी उसने बात नहीं मानी और उसने हनुमान जी को खाने के लिए अपने मुंह को फैला दिया !

Sunder Kand

हनुमान जी ने अपने शरीर को उससे दुगना बना दिया यह क्रिया के ऐसे ही चलते हैं ,लेकिन जब सुल्तान एक अपना संयोजन का किया तब हनुमान जी ने बहुत ही छोटा रूप धारण कर लिया ! और वह सुरसा के मुंह में घुस गए और तुरंत की बाहर आ गई तब उन्होंने सुरसा से कहा मैंने आपकी इच्छा पूरी कर दी है !

अब मुझे विदा कीजिए तब उन्हें बताया कि मैंने तुम्हारे ऊपर बुद्धि का पा लिया है ! जिसके लिए देवताओं ने मुझे जाकर हनुमान को आशीर्वाद दिया कि तुम श्री रामचंद्र जी का कार्य अवश्य ही करोगे ! क्योंकि तू बल और बुद्धि के भंडार इतना किए गए वहां से चली गई तब हनुमान जी प्रसन्न होकर आगे के सूत्र में एक राशि रहती थी !

राक्षसी से मुकाबला

हनुमान जी को रास्ते में उन्हें एक राक्षसी मिली वह आकाश में उड़ते हुए पक्षियों के छाया को पकड़ लेती थी और पक्षियों को जल में गिरा देती थी तब उन्हें अपना भोजन बनाती थी ! उसने वही चार हनुमान जी के साथ भी चले हनुमान जी ने उसके शव को पहचान लिया उस रास्ते की हत्या कर दी उसके बाद हनुमान जी समुद्र पार कर लिया !

लंका का सफ़र

लंका में पहुंचने के बाद हनुमान जी को एक पर्वत दिखा वे दौड़कर के ऊपर चढ़ गई पर्वत पर चढ़कर उन्होंने लंका देखी उन्होंने राक्षसों के लिए दल के पूर्व अनुमति सेना को भी देखा हनुमान जी ने देखा कि उस सुंदर स्वर्ण नगरी के महान बहुत सारे रखवाले पहरा दे रहे हैं ! उनके मन में विचार आया कि यदि वह अत्यंत शुरू करें और रात के समय नगरी में प्रवेश करें तो उन्हें कोई देख नहीं पायेगा !

कोई देख नहीं पायेगा लंका के अंदर प्रवेश करने लगी उस समय लंकिनी मां की एक रात भी पहरा दे रही है ! उसमें हनुमान जी को प्रवेश करते हुए देख लिया और बोली मेरा निरादर करके मुझे बिना पूछे कहां जा रहा है ! यहां जितने भी जो आते हैं वह सब मेरा भोजन बनते हैं . उसके ऐसा कहते ही हनुमान जी एक घुसा दिया तो लंकिनी खून की उल्टी करती हुईं गिर गई अपने आप को संभाल कर के हाथ जोड़कर विनती करने लगी कि अब लंका का विनाश का समय आ चुका है !

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