Bhagwat Geeta Updesh in Hindi Free ! भागवत गीता उपदेश

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What is Bhagwat Geeta in Hindi ! भागवत गीता क्या है ?

भागवत गीता का उपदेश बहुत ही अच्छा है , जिसके रास्ता पर चल कर दुनिया की कोई भी ऊंचाई हासिल कर सकते हैं ! एक बुक में हजारों किताब का ज्ञान समाया है, भगवत गीता 1000 साल से ज्यादा पुरानी है यह विश्वास कर पाना बहुत ही मुश्किल है कोई इतनी महत्वपूर्ण बातें हजारों साल पहले कैसे कर गया ! इसमें लिखी एक एक बात आज भी उतनी ही सत्य है बल्कि मॉडर्न लाइफस्टाइल से पैदा हुई समस्याओं का सलूशन आपको हजारों साल पहले लिखी इस किताब में मिल जाएगा अपने आप में एक अजूबा नहीं तो और क्या है !

Bhagwat Geeta Updesh in Hindi | भागवत गीता उपदेश

Bhagwat Geeta

महाभारत के युद्ध के समय अर्जुन, श्रीकृष्ण को अपनी टीम में ले लेते हैं ! श्री कृष्ण युद्ध नहीं लड़ते पर युद्ध के हर समय अर्जुन को उपदेश देते हैं ! श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया ज्ञान की भगवत गीता है ! भगवत गीता में टोटल 18 उपदेश है ! इसी कोशिश को आगे बढ़ाते हुए हम आपको भागवत गीता का संक्षिप्त उपदेश आप सभी के सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ !

उपदेश 1

अर्जुन की अपने ही लोगों से युद्ध लड़ने की हिम्मत नहीं हो रही अर्जुन को सभी लोग उसके अपने रिश्तेदार सगे संबंधी दोस्त और गुरु लगते हैं और वो पूरी तरह से हिम्मत हार चुका है अर्जुन को अपनी जित में भी अपनी हार नजर आती है अपने ही लोगों से युद्ध करने के लिए अर्जुन बिल्कुल भी तैयार नहीं है अर्जुन को लगता है अपने लोगों को ही मारने में उसको पाप लगेगा भगवान श्री कृष्ण एक अच्छे श्रोता बनकर अर्जुन की सारी बातें सुनते हैं !

उपदेश 2

भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को बताते है अर्जुन मजबूत बनो ! अपनी कायरता को अपने मन से बाहर निकाल दो ! श्री कृष्ण बताते हैं, यह युद्ध धर्म युद्ध है अर्जुन को यह भी कहा जाता है कि वह समझदार हो की भाषा बोल रहा है पर समझदार व्यक्ति ना तो किसी के जीने का ना ही मरने का शोक मनाता है ! हमारा शरीर पहले बच्चा होता है फिर जवान और फिर बुढा हो जाता है ! और फिर उसके बाद हमारी आत्मा दूसरे शरीर में चली जाती है !

आत्मा शरीर बदलती है और आत्मा अमर है ना तो आत्मा पैदा होती है ना ही आत्मा मरती है श्री कृष्ण अर्जुन को अर्जुन की ड्यूटी याद कराते हैं ! और श्री कृष्ण बताते हैं कि युद्ध लड़ना ड्यूटी है ! अपनी तरफ से अपना बेस्ट कर्म करो फल यानी रिजल्ट की चिंता बिल्कुल मत करो अगर आप सिर्फ रिजल्ट की चिंता करते हो तो हम कभी खुश नहीं रह सकते ! जो व्यक्ति अपनी इच्छाओं को त्याग कर अपने अंदर के अंधकार को मारकर जीता है तो मोक्ष की प्राप्ति करता है !

उपदेश 3

अर्जुन , कृष्ण जी से पूछते हैं कि वह युद्ध करें या सब कुछ त्याग कर सन्यासी बन जाए ! जहां पर श्री कृष्ण जी ने अर्जुन को समझाते हैं हम सभी को कोई ना कोई काम सौंपा गया है ! और यही काम हमारे लिए धर्म है ! हमें एकदम से सब कुछ नहीं त्याग देना चाहिए हम लोगों को सिर्फ और सिर्फ अपने कर्म पर ही ध्यान देना चाहिए ! भगवान श्री कृष्ण बताते हैं कर्म और यज्ञ दोनों में कोई फर्क नहीं कर्म ही हमें मोक्ष की प्राप्ति कराता है !

जो अपने ही बारे में सोचता है वह पापी है इसलिए आज अपने मोह , माया से निकल कर अपने कर्तव्य को पहचाने और अपना कर्म करें ! हम सभी समाज का हिस्सा है जो चीज सोसाइटी के लिए ठीक नहीं है वो हमारे लिए ठीक नहीं हो सकती जरूरत है ! अपने अकेले के बारे में नहीं बल्कि सबके बारे में सोचें !

उपदेश 4

श्री कृष्ण जी से अर्जुन सवाल करते हैं की आप तो खुद ही भगवान है सब जानते हैं तो उन्होंने इस धरती पर जन्म क्यों लिया ! श्री कृष्ण बताते हैं जब भी धरती पर पाप अधिक बढ़ जाता है तब भगवान धरती पर खुद अवतार लेते हैं ! कहने का मतलब है जब भी बुराई बहुत अधिक हो जाती है ! उसका नाश करने के लिए कोई ना कोई तो इस धरती पर आ ही जाती है ! श्री कृष्ण बुद्धिमान यानी इंटेलिजेंस कोर्स को मानते हैं ! जो कर्म फल की चिंता ना करें ऐसे व्यक्ति को कर्म योगी कहा गया है कर्म योगी निरंतर जारी करता है कि नहीं करता वह लगातार निरंतर अपना काम करता रहता है ! काम कंप्लीट होने के बाद दूसरा काम कर्म योगी को माया लाभ हानि की परवाह नहीं होती !

उपदेश 5


श्री कृष्ण जी बताते हैं कर्म योगी कर्म फल को त्याग कर परमात्मा को ढूंढ लेता है कहने का मतलब है ! हमारा काम ही हमारा भगवान है हमारी नाखुश हमारी दुखी होने का एक ही कारन है ! हमारे ज्ञान के ऊपर एक चादर बिछा देता है ज्ञान लाइट की तरह होता है जिसको प्राप्त करना बहुत ही जरूरी है ! ज्ञान ना होने पर इंसान समिति अधिक कंफ्यूजन में रहता है और उसे फुजूल की चीजों के लिए भटकता रहता है ! यही हमारी अशांति का कारण भी बनता है इस्या द्वेष और लोभ छोड़ दें !

उपदेश 6


श्री कृष्ण क्षते है यह हमारा कर्तव्य है कि हम पतन ना होने दें हम खुद ही अपने फ्रेंड है ! और अपने दुश्मन भी जिस व्यक्ति ने अपनी को माइंड क्वेश्चन और अपनी इंद्रियों को अपने वश में कर लिया है ! खुद का ही दोस्त है और जो व्यक्ति इन तीनों चीजों को कंट्रोल नहीं कर पाया खुद ही अपना दुश्मन है ! जो व्यक्ति खुशी में ज्यादा खुश ना हो और तुम्हें ज्यादा दुखी ना हो ऐसे व्यक्ति को परमात्मा मिलता है भगवान श्री कृष्ण लाइफ को बैलेंस करके चलने को कहते हैं !

उपदेश 7


बताते हैं हम लोग समझ ही नहीं पाते भगवान है क्या धरती पानी वायु और बाकी सभी चीजों के पीछे छिपी एक शक्ति है यह सब चीजें एक शक्ति से ही काम कर रही है ! और वह शक्ति का नाम है परमात्मा और शक्ति स्वयं श्रीकृष्ण यानि भगवान है ! ऐसे तो धरती पर हर चीज का भी परमात्मा है परमात्मा सभी चीजों में होकर विभिन्न जिलों से अलग है और अपने आपको पूरी करा भगवान को समर्पित करके ही मोक्ष की प्राप्ति की जा सकती है भगवान का ना तो जन्म हुआ है ना ही उनकी मृत्यु पॉसिबल है !

उपदेश 8


श्री कृष्ण बताते हैं जो लोग परमात्मा को प्राप्त कर लेते हैं उनको मोक्ष की प्राप्ति होती है ! और वह लोग जन्म और मृत्यु के अंदर से मुक्त हो जाते हैं जरूरत है तो अपने पूरे और अच्छे समय में परमात्मा को याद रखने की हमें अपनी इंद्रियों को कंट्रोल में रख कर सांसारिक सुखों से नाता तोड़कर परमात्मा की ओर ध्यान लगाने की आवश्यकता है !

उपदेश 9


अर्जुन पूछते हैं , भगवान का विस्तार कहां तक है और वह कहां तक फैला है ! भगवान श्री कृष्ण बताते हैं कि वह भगवान है और वह दुनिया के कन कन में समाई है और हर चीज में मौजूद है !

उपदेश 10


कृष्ण कहते हैं वह शुरू से लेकर अंत तक में है हर जीवित और मृत चीज जिसमें भगवान मौजूद हैं !

उपदेश 11


कृष्ण अर्जुन को अलौकिक शक्ति देते हैं जिससे अर्जुन श्री कृष्ण का भगवान का रूप देखते हैं ! भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को इसका प्रमाण दे देते हैं इस दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है भगवान श्री कृष्ण बताते हैं कि शक्ति से ही भगवान के इस रूप में देखा जा सकता है !

उपदेश 12

भगवान श्री कृष्ण बताते हैं जो व्यक्ति सच्चे मन से संसार इन चीजों से परे रहकर भगवान में मन लगाता है ! वही उत्तम योगी है भगवान की भक्ति सबसे ऊपर है !

उपदेश 13

श्री कृष्ण बताते हैं हमारी बॉडी एक छोटा सा ब्रह्मांड है जो पांच तत्वों से बनी है और हमारे इस शरीर को पावर मिलती है आत्मा से परमात्मा को पावर देता है भगवान लेकिन भगवान को देख पाना मनुष्य के लिए आसान नहीं है और भगवान जो सारी चीजें बनाते हैं सारी चीजों में मौजूद भी है ! जो भी भगवान ने बनाई है उसमें भगवान खुद मौजूद है !

उपदेश 14

आपके मन में एक सवाल जरूर आया होगा अगर भगवान स्वयं हमसे सब कुछ कर आता है तो हमें भगवान के द्वारा करवाई गई काम की सजा क्यों मिलती है ! यह काम तो हमसे भगवान ने करवाया है ! श्री कृष्ण बताते हैं हम कोई भी काम खुद नहीं करते सब कुदरत हमसे करवाती है ! पर हम डिसीजन खुद लेते हैं हम सभी को सोचने समझने की शक्ति दी गई है जो भी काम हम करते हैं उसके लिए हम खुद जिमेवार है भगवान नहीं !

उपदेश 15

श्री कृष्ण बताते हैं समझदार इंसान मैटेरियलिस्टिक चीजों से अपनी कष्ट दर्ज करके रखता है ! उसका ध्यान तो परमात्मा की ओर होता है और यही सही जिंदगी जीने का तरीका है !

उपदेश 16

श्री कृष्ण बताते हैं दो तरह के लोग होते हैं अच्छा काम करने वाले और बुरा काम करने वाले ज्यादातर लोगों में अच्छे और बुरे दोनों औरतें होती है ! और जीवन को अच्छा बनाने के लिए जरूरत बुरी आदतों को खत्म करके अच्छी काम करने की है !

उपदेश17

भगवान श्री कृष्ण बताते हैं यानी खाना तीन तरह का होता है फूल वह है जो हमारी हेल्थ के लिए अच्छा है ! और हमें खाना भी चाहिए रात तक भोजन वह है जो घटना है ओन्ली है ऐसे ठीक है आपके मॉडर्न वर्ल्ड में हम कह सकते हैं ! यह झूठ है यह हमारे शरीर में चीज पैदा करता है मानसिक भोजन वह है जो जिसे पता ही नहीं है और ना ही यह हमारे लिए अच्छा है जैसे मांस और शराब से दूर ही रहना चाहिए और तामसिक भोजन हमारी हेल्प लाइन पर बुरा प्रभाव डालते हैं ! श्री कृष्ण यह भी बताते हैं हमें निस्वार्थ भाव से जरूरतमंद लोगों को दान देना चाहिए श्री कृष्ण बताते हैं हम कड़ी तपस्या और मेहनत से जिंदगी में सब कुछ प्राप्त कर सकते हैं !

उपदेश 18

श्री कृष्ण कहते हैं उनमें मन लगाकर उनके भक्त बन जाओ और अपना सब कुछ उनको और बंद कर दो जने तरीका है ! भगवान को प्राप्त करने का भगवान श्री कृष्ण अर्जुन के मन की सारी शंकाएं दूर कर देते हैं ! अर्जुन को अपना कर्तव्य समझ आ चुका है वह युद्ध लड़ने के लिए तैयार है !

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